मेरे कदम रुक जाते हैं …दहलीज़ पर …इसे

Posted: April 27, 2013 by anitahadasangwan in Uncategorized
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मेरे कदम रुक जाते हैं …दहलीज़ पर …

इसे लांघ कर कोरा  कागज़ है आगे …

या कोरा दिखता है ? लिखा है सब …

मेरी मुस्कुराहटें और आहें … मेरे आंसू और खुशियाँ …

इन कोरे पन्नो में लिखी है किस्मत …

छोड़े जा रही हूँ सर्वस्व ..अपनी पहचान …

 

छोड़े जा रही हूँ …

इस आँगन में अपने नन्हे क़दमों की  आहट …

वो रटी हुई पहली अंग्रेज़ी कविता के शब्द …

बाबुल की गोदी, माँ के आँचल में छुपे मेरे सपने …

भैया के हाथों में  अप्रत्यक्ष राखी के धागे  …

छोड़े जा रही हूँ …

 

दीवार पर लगी पहले स्कूल के दिन की तस्वीर …

और अलमारी से झांकती वो खेल की ट्राफी …

पीपल के पेड़ की टहनी से झूलता टूटा झूला …

और रसोई में बनी वो पहली रोटी की याद …

छोड़े जा रही हूँ …

 

आँगन के कोने कोने में हंसी छुपी है मेरी …

झारोंखें की सलांखों में दबे है कई आँसू …

चौखट में मिटी हुई कई रंगोली हैं मेरी …

और बुझे  हुए कई दीपक के तेल के निशाँ …

छोड़े जा रही हूँ …

 

छोड़े जा रही हूँ सर्वस्व ..अपनी पहचान …

मेरे कदम रुक जाते हैं …दहलीज़ पर …

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